June 2009 - अंगारे

अंगारे

हाथों में अंगारों को लिये सोच रहा था / कोई मुझे अंगारों की तासीर बताये ।

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Tuesday, June 9, 2009

व्यंग्यलोकतंत्रम् अभ्युत्थानम्- विनोद विप्लव

3:36 AM 0
मतदाताओं की चिरपरिचित मूर्खता और अपरिपक्वता के कारण पिछले कई चुनावों की तरह इस चुनाव में भी लोकतांत्रिक भावना का धक्का पहुंचा है। हालांकि प...
Read more »

Friday, June 5, 2009

Wednesday, June 3, 2009

कभी बेचते थे मूंगफली, चराते थे भैंसे, ढोते थे रिक्‍शा, हांके थे तांगे, आज पत्रकार हो गये ।।

2:53 AM 3
अखबार निकालें, गरीबी हटायें अखबार निकालें, गरीबी हटायें अगर गरीबी हो मुकाबिल तो अखबार निकालो । चाहिये अकूत सम्‍पत्ति तो अखबार निकालो ।। अगर...
Read more »

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages